Saturday, 27 February 2016

योग का इतिहास : History of Yoga in Hindi

योग एक प्रकार का शारीरिक, मानसिक और अध्यात्मिक क्रिया है जिसकी उत्पत्ति आदिकाल में भारत में हुई थी. योग को कई भारतीय धर्मों ने अपने तरीके से अपनाया, जैसे की हिन्दू, बौध और जैन धर्मों में. सभी तरह के योग में हट्ठ योग और राज योग ही बहुत प्रचलित है.

योग का वर्णन वैदिक कल से भी पहले देखा गया है इसका पहला वर्णन रिगुवेद में पाया जाता है. इसलिए येह मन गया है की इस की उत्पत्ति छटवी या सातवी सताब्दी ईशापूर्व हुई होगी.

सभी ग्रंथों में पतंजलि की योगसूत्र ही सबसे प्रख्यात है, इसकी उत्पाई तो वादिक काल में हो गयी थी परन्तु बीसवी सदी में आकार इसका बहुत प्रचालन हुआ.

19वि सदी मं स्वामी विवेकानंद ने जब योग को पश्चिमी देशों में प्रचलित किया उसके बाद बहुत से गुरुओं ने इसे पश्चिम में लोकप्रिय बना दिया, आज भी पछिम में योग बहुत ही प्रचलित है.

वादिक संस्कृत में योग का मतलब होता है जोड़ना- अध्यात्मिक रूप से अपनी आत्मा को परमात्मा से जोड़ना. और इसी श्रंखला का नाम योग अभ्यास है.

आज योग को सिर्फ व्याम की दृष्टी से देखा जाता है और लोग इसे तभी अपनाते है जब उन्हे कसी प्रकार की शारीरिक तकलीफ हो जाती है.

योग में व्यायाम के आलावा भी भुत कुछ है, येह आपके मन को और बूढी को तेज बनता है और आपको प्रसन्न चित रखता है.

पश्चिमी देशों में योग पर बहुत से शोध ही है और इनमे बहुत ही बढ़िया परिनाम आया है, किस जटिल बीमारियाँ भी योग से ठीक हो सकती है जैसे की, मध्मेह, अस्थमा, पिट दर्द, सर दर्द और कमजोरी,

अदि काल से भगवन सिव को पहला योगी मन गया है. हिन्दू धर्म में बहुत से कर्ण=म कंडों में योगिक क्रिया का प्रयोग किया जाता है और इसे बहुत इस सम्मान की दृष्टी से देखा जाता है.

योग की बारे में और जानने के लिए कृपया पढ़ें:

Yoga Benefits In Hindi | योग करने के 7 लाभ जो आप नहीं जानते

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वैसे तो योग के बहुत से गुण और लाभ है परन्तु यहाँ हम उन 10 लाभ के बारे में बतायेंगे जो हर किसी के लिए लागु होते है.
योग भारत के ऋषि मुनियों के द्वारा विकशित किया हुआ विज्ञानं है जो आज भारत में ही कम होता जा रहा है, आज विदेशों में योग का ज्यादा चलन है और वहा के लोग इसे ज्यादा अच्छी तरह अपना रहे है. 

अयियें देखे योग के दस बेहतरीन गुण.

१. मस्पेशियों की ताकत को बढ़ता है

ज्यादातर लोग येह मानते है की योग से मश्पेसिया नहीं बनती और येह तो सिर्फ बुजुर्गों के लिए है परन्तु ऐसा नहीं है. युवानों को जिम जाकर मंश्पेसिया बनाने से जायदा अच्छा है की वह योग करें, योग में खास कर हठ योग एक ऐसी विशी है जो की मंश्पेसों के विकाश और मजबूती देने में सहायक है.


२. शारीरिक ढांचे को लचील बनता है

कुछ लोग योग इसीलिए नहीं करते है क्यूँ की उन शारीर लचीला नहीं होता परन्तु शारीर को लचीला बनाने के लिए ही तो योग किया जाता है. 
अगर आप आज से रोजाना योग करने की आदत बना लें तो कुछ मानिनो में आप अपने शरीर में बादलों देखने लगेंगे.

आपका शिर ज्यादा लचीला हो जायेगा और आपको चोट कम लगेगी.

३. योग से याददास्त बढती है

योग का सबसे पहला मन्त्र है की आपको एकाग्र हना सिकना पड़ेगा, दूसरा मनर है की आपको स्वसन क्रिया पर काबू पाना सीखना होगा और तीसरा मंत्र है की आपको मानसिक शांति और शक्ति को बढ़ाना है.

जब आप इन सभी तरह के करिओं का अभ्यास करते है तो आपका मन एकाग्र और तीव्र हो जाता है.

विद्यार्थियों के लिए योग एक वरदान है अगर वह इसका इस्तेमाल सीखें.

४. मोटापा कम करता है

जी हाँ , योग से आपके मोटापे पर भी काबू पाया जा सकता है. करना येह है की योग रोजाना करना है और किसी गुरु के साथ करना है.

रोजाना योग करने से शारीरिक चर्बी आहति है और भोजन पेय नियंत्रण आता है, पर इसे रोजाना करना है लम्बे समय तक, एक दो हफ़्तों में कुछ नहीं होगा.

५. योग से शारीरिक दर्द कम होता है


योग करने से स्नायुं, मंश्पेसियाँ, और हड्डियाँ मजबूत होई है और साथ ही साथ आपके माशिक संहंशिलता भी बदती है, करना येह है की अगर को शारीरक दर्द है तो किसी गुरु के सानिध्य में योग शुरू करें ताकि आप अपना दर्द  बाधा ना लें.

६. योग फेफड़ों की और स्वसन की बीमारी से बचाता है


योग की एक सबसे महत्वपूर्ण क्रिया है स्वसन क्रिया, इनमें प्रमुक है, कपल भांति, उर्जरा और आलोम विलोम, अगर आप इन क्रियानो का बहुत ही बहली भांति प्रयोग करेंगे तो आपको अच्छा परिणाम मिलेगा, आपको बस इसे रोजाना करना है.

७. ब्लड प्रेशर को नार्मल करता है


रक्तचाप एक बहुत ही बुरी बीमारी है येह अन्दर ही अन्दर आपको कमजोर बना देती है साथ ही दिल की और बिमारियों को न्योता देती है.

योग की क्रियनों से आपको बहुत ही बढ़िया लाभ मिलता है और रक्चाप कम होने लगता है, मेरा सुझाव है की आप दवाई पर उरी तरह निर्भर ना रहे और योग का उपयोग करें लाभ होगा.